41 साल बाद बदला मंजर, 1984 दंगों के परिवारों के लिए ऐतिहासिक फैसला
नई दिल्ली
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को 1984 के सिख दंगों में मारे गए लोगों के परिवारों को नौकरी का ज्वाइनिंग लेटर सौंपा। 125 परिवारों को राजस्व विभाग में नौकरी दी गई है, जिनमें से 19 परिवारों के सदस्य आज से ज्वाइन कर रहे हैं। ज्यादातर नियुक्तियां तिलक नगर क्षेत्र के लोगों को मिली हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह दंगों में अपार त्रासदी हुई, उससे सभी ने दुख सहा और धैर्य बनाए रखा। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने अब इस पीड़ा को ध्यान में रखते हुए नौकरी देने का निर्णय लिया है।
कोविड पीड़ितों और अन्य वर्गों के लिए राहत योजनाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि कोविड-19 में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए भी एक कमेटी बनाई जाएगी, जो उन्हें राहत प्रदान करेगी। इसके अलावा, इमरजेंसी के दौरान जेल में रहे लोगों और स्वतंत्रता सेनानियों को पेंशन देने का भी ऐलान किया गया।
40 साल के संघर्ष के बाद मिली यह सफलता
कैबिनेट मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि 1984 दंगों के पीड़ित परिवारों को नौकरी देने के लिए एक कमेटी बैठी थी, लेकिन इस मुद्दे पर किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब यह निर्णय संभव हो पाया। दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के हरमीत सिंह कालका ने इस लड़ाई का नेतृत्व किया।
हरमीत सिंह कालका ने मुख्यमंत्री को बताया कि एलजी ने 125 लोगों को नौकरी देने का निर्देश दिया था। कई लोग इतने वर्षों बाद उम्र सीमा पूरी कर चुके हैं, इसलिए उनके बच्चों को नौकरी देने पर मुख्यमंत्री ने उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने माँगी माफी
नौकरी देने में हुई देरी के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने माफी मांगी और कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री होने के नाते वे इस दुख को समझती हैं। उन्होंने परिवारों के धैर्य और संघर्ष की सराहना की।
