“क्या ये शो ‘कॉफी विद करण’ से भी शार्प है?”
करण जौहर वापस आ गए हैं… लेकिन इस बार कॉफी या गॉसिप नहीं, बल्कि एक दिमागी खेल लेकर।उनका नया रियलिटी शो जिसे कहा जा रहा है – India’s Most Intelligent Reality Show. बड़ा सेट, हाई-एंड प्रोडक्शन, और कंटेस्टेंट्स जो दिमागी टास्क्स में एक-दूसरे को मात देने की कोशिश करते हैं…लेकिन सवाल ये है — क्या वाकई शो दिमाग का खेल है, या फिर सिर्फ कैमरे के लिए किया जा रहा है इमोशनल ड्रामा?अगर आप ‘बिग बॉस’ जैसे शोज से बोर हो चुके हैं और कुछ अलग देखना चाहते हैं, तो ‘द ट्रेटर्स’ आपके लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है. हमने इस शो के पहले तीन एपिसोड देखे हैं और यहां हम आपको बताएंगे कि ये कितना मजेदार है और कहां ये आपको थोड़ा निराश कर सकता है.
क्या है ‘द ट्रेटर्स’ का ये नया गेम?
‘द ट्रेटर्स’ एक फॉरेन रिएलिटी शो का देसी इंडियन रूप है. इसमें कुछ 3 लोगों को ‘धोखेबाज’ (ट्रेटर्स) चुना गया है और बाकी सभी यहां बेगुनाह (इनोसेंट) हैं. धोखेबाजों का काम चुपचाप ईमानदार लोगों को गेम से बाहर निकालना है. वहीं, ईमानदार लोगों को ये पहचानना होता है कि धोखेबाज कौन हैं. हर रात धोखेबाज (ट्रेटर्स) आपस में बात करने के बाद एक का ‘मर्डर’ करते हैं. (यानी एक कंटेस्टेंट को गेम से बाहर कर दिया जाता है) और फिर बाकी के बेगुनाह अगले दिन ‘सर्कल ऑफ शक’ में आपस में चर्चा करते हुए उनमें छिपे ट्रेटर को बाहर करने की कोशिश करते हैं. ये गेम पूरा का पूरा शक, प्लान बनाने और झूठ पर टिका है. अब तक स्ट्रीम हो रहे तीन एपिसोड में अब तक 4 लोग शो से बाहर हो चुके हैं. इनमें कौनसे ट्रेटर थे और कौनसे बेगुनाह ये जानने के लिए आपको एमेजॉन प्राइम वीडियो पर ‘द ट्रेटर्स’ देखना होगा.
जानें कैसा है शो
शो की शुरुआत में ही करण जौहर ने कंटेस्टेंट में से ‘ट्रेटर्स’ को चुनकर गेम को रोमांचक बना दिया. पहला एपिसोड थोड़ा धीमा और बोरिंग लगा. लेकिन दूसरे और तीसरे एपिसोड में शो ने रफ्तार पकड़ ली. जैसे-जैसे कंटेस्टेंट ने चालें चलनी शुरू कर दीं, उनका आपस में शक बढ़ता गया और ‘मर्डर’ व ‘बैनिशमेंट’ (गेम से बाहर निकालना) के बाद जब उन्हें असली मजा आना शुरू हुआ, तब शो और दिलचस्प लगने लगा.
‘द ट्रेटर्स’ की अच्छी बातें
प्रोडक्शन वैल्यू
शो की प्रोडक्शन क्वालिटी बहुत बढ़िया है. कैमरे का काम, सेट और दिखने में ये किसी हॉलीवुड शो जैसा लगता है. इसे ओटीटी पर देखने का एक शानदार अनुभव है.
‘बिग बॉस’ जैसी बोरियत नहीं
अगर आप ‘बिग बॉस’ की एक जैसी लड़ाइयों और पहले से लिखी हुई कहानियों से ऊब चुके हैं, तो ‘द ट्रेटर्स’ एक नयापन लाता है. यहां हर कंटेस्टेंट दिमाग से खेल रहा है और कुछ भी अंदाजा लगाना मुश्किल है.
दिमाग का खेल
ये शो सिर्फ झगड़ों या रोने-धोने वाला नहीं है. ये पूरी तरह से दिमागी खेल है, जहां दिमाग की लड़ाई देखी जाती है. धोखेबाज कैसे झूठ बोलते हैं और ईमानदार लोग सच कैसे ढूंढते हैं, ये देखना बहुत दिलचस्प है.
नया आइडिया
भारतीय दर्शकों के लिए इस शो का आइडिया बिल्कुल नया है. शुरुआत में शायद समझने में थोड़ा समय लगे, लेकिन एक बार जब आप गेम में घुस जाएंगे तो बहुत मजा आएगा.
करण जौहर की होस्टिंग
करण जौहर ने होस्ट के तौर पर गेम को अच्छे से संभाला है. उनकी होस्टिंग शो को और भी आकर्षक और मजेदार बनाती है.
‘द ट्रेटर्स’ की कुछ कमियां
शुरुआत थोड़ी धीमी पहला एपिसोड थोड़ा धीमा है, जो शायद नए दर्शकों को शुरुआत में बांध नहीं पाएगा. गेम को समझने में थोड़ा धैर्य रखना पड़ता है.
कहीं-कहीं थोड़ा ज्यादा ड्रामा
इस शो के इंडियन फॉर्मेट में कुछ जगह थोड़ी ज्यादा एक्टिंग या ड्रामा दिखाने की कोशिश की गई है, जिसकी शायद उतनी जरूरत नहीं थी.
अंतरराष्ट्रीय शो से तुलना
जिन लोगों ने इसके विदेशी वर्जन देखे हैं, उन्हें शायद इंडियन फॉर्मेट कुछ जगहों पर थोड़ा कमज़ोर लग सकता है.
सबके लिए नहीं
अगर आपको सिर्फ बिग बॉस वाला चिल्लाना और लाउड ड्रामा पसंद है, तो शायद ये शो आपको उतना पसंद न आए, क्योंकि ये दिमाग और चुपचाप की जाने वाली धोखेबाजी पर ज्यादा फोकस करता है.
