“गगनयान के लिए ये अनुभव अमूल्य है”
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने एक्सियम मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर बिताए अपने अनुभव साझा किए। दिल्ली स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि वे इस मिशन में पायलट और कमांडर रहे।
शुभांशु ने कहा कि दो हफ्तों तक ISS पर रहते हुए उन्होंने कई वैज्ञानिक प्रयोग किए और तस्वीरें लीं। इसके लिए उन्हें रूस, अमेरिका और भारत में गहन ट्रेनिंग से गुजरना पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि अंतरिक्ष यात्रा के दौरान डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन भरोसेमंद टीम और ट्रेनिंग इस भय को संभालने में मदद करती है।

उन्होंने कहा,
“अगर हम कहें कि डर कभी नहीं लगता, तो यह गलत होगा। डर सबको लगता है, लेकिन हमारे पीछे एक मजबूत टीम होती है जिस पर हम अपनी जिंदगी भरोसा करके छोड़ देते हैं।”
शुभांशु शुक्ला के 5 सवाल-जवाब
सवाल: एक्सपेरिमेंट्स पर क्या प्रगति हुई?
जवाब: डेटा एनालिसिस जारी है। कुछ महीनों में नतीजे सामने आएंगे।
सवाल: गगनयान ट्रेनिंग और एक्सियम मिशन ट्रेनिंग में क्या अंतर है?
जवाब: रूस, भारत और अमेरिका में ट्रेनिंग अलग-अलग तरीके से होती है, लेकिन उद्देश्य एक ही होता है।
सवाल: एक्सियम मिशन से गगनयान के लिए क्या सीख मिली?
जवाब: किताबों से अलग असली अनुभव बहुत कुछ सिखाता है। यह मिशन हमारे लिए बहुमूल्य अनुभव है।
सवाल: लॉन्चिंग के समय क्या महसूस हुआ?
जवाब: मैं उत्साहित था। यह रिस्की था, लेकिन जीवन में हर जगह रिस्क होता है। मैंने इसे मैनेज किया।
सवाल: कठिन समय में किसे याद करते हैं?
जवाब: लॉन्चिंग का अनुभव शब्दों में बयान करना मुश्किल है। यह एहसास जीवनभर याद रहेगा।
गगनयान मिशन 2027
इसरो का महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन 2027 में लॉन्च किया जाएगा। इसके तहत भारतीय वायुसेना के 3 पायलट्स को 400 किलोमीटर ऊँचाई वाले ऑर्बिट में भेजा जाएगा। वे 3 दिन अंतरिक्ष में रहेंगे और उसके बाद हिंद महासागर में सुरक्षित लैंडिंग करेंगे।
मिशन की अनुमानित लागत: ₹20,193 करोड़
अभी वायुसेना के 4 पायलट्स को चुना गया है, जिनमें शुभांशु शुक्ला भी शामिल हैं।
इससे पहले इसरो दो खाली टेस्ट फ्लाइट और एक रोबोटिक फ्लाइट भेजेगा।
गगनयान मिशन से भारत को फायदे
भारत रूस, अमेरिका और चीन के बाद इंसान को अंतरिक्ष में भेजने वाला चौथा देश बनेगा।
अंतरिक्ष विज्ञान और शोध में भारत की क्षमता बढ़ेगी।
भविष्य में भारतीय स्पेस स्टेशन की राह आसान होगी।
रिसर्च और डेवलपमेंट में नए रोजगार और निवेश के अवसर मिलेंगे।
स्पेस इकोनॉमी (जो 2035 तक 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है) में भारत की मजबूत हिस्सेदारी बनेगी।
शुभांशु शुक्ला का कहना है कि एक्सियम मिशन का अनुभव गगनयान और भारत के आने वाले अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
