शेख हसीना पर बड़ा आरोप
Bangladesh : बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ सकता है पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर गंभीर आरोप हैं।
उन पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने ढाका में निहत्थे नागरिकों, खासकर छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था।ये मामला 2024 के जुलाई-अगस्त विद्रोह से जुड़ा है, जब हज़ारों छात्र सड़कों पर आंदोलन कर रहे थे।आरोप है कि हसीना ने सुरक्षा बलों को “जीवित लक्ष्यों” पर गोली चलाने का निर्देश दिया था।विशेष अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-BD) ने उन पर मानवता के खिलाफ अपराध के पाँच आरोप दायर किए हैं।अभियोजन पक्ष का कहना है कि हसीना ने हेलेप्टर से हथियार इस्तेमाल करने का आदेश दिया था।एक आरोप में यह शामिल है कि छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों को ढाका के चंकारपुल इलाके में गोला मारकर मारा गया।दूसरी घटनाओं में असहाय लोगों की हत्या, बलात्कार, तथा “मानवता के खिलाफ अन्य कृत्य” किए गए, जो न्यायालय में गंभीर बनाम आपराधिक ज़ुर्म के दायरे में लाए गए हैं।

हसीना ने इन सभी आरोपों को सार्वजनिक रूप से खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने “निरस्त्र नागरिकों पर गोली चलाने का आदेश कभी नहीं दिया।”उनके वकील यह भी कह रहे हैं कि न्यायिक प्रक्रिया पक्षपाती और पूर्वनिर्धारित (pre-determined) है, और यह “कांगारू कोर्ट” जैसा है।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने उनकी जिम्मेदारी को दर्शाने के लिए लीक कॉल और ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला दिया है, जिसमें कथित रूप से हसीना की आवाज़ सुनाई गई है कि उन पर “227 मामलों” के आरोप हैं और उनके पास “लाइसेंस टू किल” है।मानवाधिकार समूहों और स्वतंत्र जाँचकर्ताओं ने भी वीडियो और फुटेज पेश किए हैं, जिनमें दिखाया गया है कि पुलिस ने बिना किसी स्पष्ट खतरे के निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की।अभियोजन पक्ष ने यह तर्क दिया है कि यह सभी घटनाएँ संघ 조직बद्ध हमले का हिस्सा थीं, न कि सिर्फ आत्मरक्षा या नियंत्रित कार्रवाई।इस मुकदमे का नतीजा बांग्लादेश की राजनीति के लिए बहुत अहम है — फैसला आने वाला दिन देश में तनाव बढ़ा सकता है।अभियोजन ने सबसे कठोर सज़ा की मांग की है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें मृत्युदण्ड की भी माँग की गई है।इसके अलावा, आरोप लगाया गया है कि हसीना की संपत्तियों को नष्ट या ज़ब्त करने की मांग भी हुई है, ताकि पीड़ितों और मृतकों के परिवार को मुआवज़ा मिल सके।
वहीं, देश में उच्च स्तर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है क्योंकि कोर्ट के फैसले को लेकर हिंसा की आशंका है।अगर हसीना दोषी करार दी जाती हैं, तो यह न सिर्फ उन्हें कानूनी रूप से बड़े संकट में डाल देगा, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।लेकिन अगर वह बरी हो जाती हैं, तो यह उनके समर्थकों के लिए बड़ी जीत होगी और उनकी पॉलिटिकल छवि को मजबूत करेगा।

निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की इस कहानी ने साबित कर दिया है कि सत्ता, हिंसा और मानवाधिकार का सवाल कभी सिर्फ कानूनी मामला नहीं होता — यह राष्ट्रीय पहचान और न्याय का मुद्दा बन जाता है।
