मिडिल ईस्ट संकट: लेबनान से शुरू हुई चिंगारी अब ईरान और इजराइल के बीच सीधे महायुद्ध में तब्दील हो गई है। जानिए कैसे 11 दिनों के भीतर 11 देश इस युद्ध की आग में झुलसने लगे हैं।
नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट इस वक्त अपने इतिहास के सबसे खतरनाक मोड़ पर खड़ा है। पिछले 11 दिनों के भीतर युद्ध का दायरा इतनी तेजी से फैला है कि अब इसमें 11 देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो चुके हैं। ईरान द्वारा इजराइल पर किए गए सीधे बैलिस्टिक मिसाइल हमलों ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) की आहट सुना दी है। लेबनान की गलियों से लेकर लाल सागर की लहरों तक, सिर्फ धमाकों और मलबे का मंजर दिखाई दे रहा है।
11 दिन और तबाही का खौफनाक मंजर
पिछले 11 दिनों में युद्ध की तीव्रता ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को फेल कर दिया है। जहाँ पहले यह लड़ाई सिर्फ इजराइल और हमास के बीच गाजा तक सीमित थी, वहीं अब इसका केंद्र उत्तर की ओर लेबनान और पूर्व की ओर ईरान की तरफ खिसक गया है। इजराइल के ‘आयरन डोम’ और ‘एरो’ डिफेंस सिस्टम चौबीसों घंटे सक्रिय हैं, क्योंकि आसमान से सिर्फ मिसाइलें ही नहीं, बल्कि सुसाइड ड्रोन की बारिश हो रही है।

जंग के मैदान में ये 11 मुल्क: कौन किसके साथ?
इस संघर्ष ने पूरे मिडिल ईस्ट को दो गुटों में बांट दिया है। मुख्य रूप से ये देश इस युद्ध के केंद्र में हैं:
- इजराइल: लेबनान और गाजा में जमीनी सेना उतार चुका है।
- ईरान: इजराइल पर सीधे तौर पर करीब 200 मिसाइलें दागकर युद्ध का नया मोर्चा खोल दिया है।
- लेबनान (हिजबुल्ला): इजराइल के उत्तरी हिस्से पर लगातार रॉकेट हमले कर रहा है।
- यमन (हुती विद्रोही): लाल सागर में जहाजों को निशाना बना रहे हैं और इजराइल की ओर लॉन्ग-रेंज ड्रोन भेज रहे हैं।
- सीरिया और इराक: यहाँ स्थित ईरान समर्थित गुट इजराइली ठिकानों पर हमले कर रहे हैं।
- जॉर्डन: ईरानी मिसाइलों को अपने हवाई क्षेत्र में मार गिराने के कारण तनाव में है।
- अमेरिका और ब्रिटेन: इजराइल की रक्षा के लिए भूमध्य सागर में अपनी नौसेना तैनात कर चुके हैं।
- सऊदी अरब और यूएई: क्षेत्र में बढ़ते तनाव और तेल की सप्लाई को लेकर हाई अलर्ट पर हैं।
तकनीकी युद्ध: हाइपरसोनिक मिसाइल बनाम एयर डिफेंस
इस 11 दिवसीय संघर्ष की सबसे बड़ी बात ‘टेक्नोलॉजी’ है। ईरान ने दावा किया है कि उसने पहली बार ‘फत्ताह’ हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जो किसी भी रडार की पकड़ में नहीं आतीं। वहीं, इजराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर दुनिया का सबसे उन्नत एयर डिफेंस वॉल खड़ा किया है। हालांकि, दर्जनों मिसाइलों के जमीन पर गिरने से इजराइल के सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुँचने की खबरें भी सामने आई हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध अगले कुछ दिनों तक और चलता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। स्वेज नहर और हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों पर खतरा मंडराने से भारत सहित कई देशों में महंगाई बढ़ सकती है।दुनिया भर की नजरें अब इजराइल के जवाबी हमले पर टिकी हैं। क्या इजराइल ईरान के परमाणु ठिकानों या तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाएगा? अगर ऐसा होता है, तो यह 11 दिनों की तबाही एक ऐसे पूर्ण युद्ध में बदल जाएगी जिसे रोकना किसी के वश में नहीं होगा।
