फ्लाइट कैंसिल का घोटाला!
दोस्तों, जरा सोचिए…आपने टिकट बुक कर ली…सिस्टम पर फ्लाइट का स्टेटस दिख रहा है ऑन–टाइम…आप पूरी तैयारी के साथ एयरपोर्ट पहुंचते हैं, बैगेज चेक-इन करवा लेते हैं, बोर्डिंग वेट करते हैं… और तभी अचानक ऐलान होता है फ्लाइट कैंसिल।अब सवाल ये है कि,लेकिन अब सवाल ये है कि,जब सिस्टम पर सबकुछ ठीक दिख रहा था,तो एयरपोर्ट पर पहुंचकर अचानक क्या हो गया?❗यहां पर शुरू होता है असली “लूट का खेल” एयरलाइंस का कहना, “टेक्निकल इश्यू” लेकिन रिफंड मिलेगा कब? “प्रोसेस में है”दूसरा टिकट महंगा, मजबूरी में लोग खरीदते हैं और एयरलाइंस फायदा उठाती हैं!यानी यात्रियों की जेब से पैसा और समय दोनों की चोरी!

क्या ऑनलाइन स्टेटस जानबूझकर अपडेट नहीं किया जाता ताकि लोग एयरपोर्ट पहुंचे?
👉 अगर फ्लाइट कैंसिल थी तो
तो पहले अपडेट क्यों नहीं किया गया?
👉 क्यों यात्रियों को एक क्लिक पर सही जानकारी नहीं मिलती?
रिफंड और मुआवजे से बचने का यह है पूरा ‘गणित’ !
इस अव्यवस्था के पीछे एक गहरा आर्थिक गणित छिपा है, जिसे समझना हर यात्री के लिए जरूरी है. दरअसल, इंडिगो के सिस्टम में फ्लाइट को जानबूझकर आखिरी वक्त तक ‘शेड्यूल’ या ‘लेट’ दिखाया जाता है. इसके पीछे सीधा कारण पैसे बचाना है.
नियमों के मुताबिक, अगर एयरलाइन खुद फ्लाइट कैंसिल करती है और यात्री को पहले बता देती है, तो उसे पूरा पैसा (100% रिफंड) वापस करना पड़ता है. लेकिन अगर यात्री घबराहट में या देरी देखकर खुद टिकट कैंसिल कर दे, तो एयरलाइन कैंसिलेशन चार्ज काट लेती है. इंडिगो इसी पेंच का फायदा उठा रही है. वे यात्रियों को अधर में रखते हैं ताकि लोग परेशान होकर खुद टिकट कैंसिल करें और कंपनी को पूरा पैसा वापस न करना पड़े.
यही वजह है कि लोग कह रहे हैं “सिस्टम पर ऑनटाइम, एयरपोर्ट पर कैंसिल – ये धोखा नहीं तो क्या है?”अब जरूरत है कड़े नियमों की जो कंपनियां बार-बार ऐसा खेल खेलें,उन पर भारी जुर्माना हो,और यात्रियों का पैसा टाइम पर वापस मिले।
