10 मिनट की ठंड या ज़िंदगी भर का नुक़सान?
आजकल फिटनेस की दुनिया में एक ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है – आइस बाथ। खिलाड़ी, सेलेब्रिटीज़ और जिम लवर्स… सब इसके फैन बनते जा रहे हैं। लेकिन क्या ये वाकई उतना फायदेमंद है जितना बताया जा रहा है? या इसके पीछे भी है कुछ छिपा हुआ सच?आइस बाथ यानी बर्फ से भरे ठंडे पानी में कुछ मिनटों तक बैठना। इसे cold therapy या cold immersion भी कहा जाता है। आमतौर पर intense वर्कआउट या स्पोर्ट्स के बाद इसका इस्तेमाल किया जाता है ताकि सूजन कम हो और शरीर जल्दी रिकवर कर सके।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आइस बाथ के कुछ साइंटिफिकली प्रूव्ड फायदे हैं –”
मांसपेशियों की सूजन में राहत
रिकवरी स्पीड बढ़ती है
माइक्रो-इंजरी से बचाव
ब्लड सर्कुलेशन में सुधार
मानसिक स्ट्रेस कम करना
लेकिन आइस बाथ से सेहत को नुकसान भी पहुंच सकता है. जिन लोगों को हार्ट से जुड़ी समस्या, हाई ब्लड प्रेशर, सिर में दर्द, डायबिटीज, न्यूरोलॉजिस्ट समस्याएं और कई तरह की समस्याओं में इससे सेहत को नुकसान भी पहुंच सकता है. इसलिए इसे एक्सपर्ट की सलाह लिए बिना नहीं करना चाहिए.आइस बाथ किसी एक्सपर्ट की सलाह और निगरानी में ही करना चाहिए. इसके अलावा शुरुआत में 1 से 2 मिनट फिर बाद में धीरे-धीरे समय बढ़ाना चाहिए. साथ ही इससे पहले शरीर के तापमान का भी ख्याल रखना चाहिए. अगर टब में जाते ही परेशानी हो, तो तुरंत बंद कर देना चाहिए.
