Historic Alliance: भारत–रूस अब ‘ONE ARMY’!
आज हम बात करेंगे एक ऐसी महत्वपूर्ण डिफेंस डील की — जो भारत और रूस के बीच हमारी दोस्ती को अगला बड़ा पायदान दे सकती है। हां, मैं बात कर रही हूँ RELOS Agreement की।आज दुनिया भर की सुर्खियाँ राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे पर केंद्रित हैं, परंतु इसी क्षण दिल्ली और मॉस्को ने एक ऐसी सामरिक पहल की है जिसने वैश्विक कूटनीति का पूरा मेरिडियन रिस्ट्रक्चर कर दिया है — Reciprocal Exchange of Logistics Agreement – RELOS को मंज़ूरी. यह सहमति महज़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाले दशक के वैश्विक शक्ति-संतुलन को पुनर्परिभाषित करने वाला एक निर्णायक कदम है, जिसे आने वाले वर्षों में रणनीतिक हलकों में “India’s Arctic Entry Point” के नाम से याद किया जाएगा.

RELOS क्या है?
RELOS यानी Reciprocal Exchange of Logistic Support — एक ऐसा लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट है, जिसे भारत–रूस ने 18 फ़रवरी 2025 को साइन किया था। दिसंबर 2025 में रूस की संसद (स्टेट ड्यूमा) ने इसे औपचारिक रूप से रैटिफाई (स्वीकार) कर लिया है।
इस समझौते से क्या बदलेगा?
अब भारत के जहाज़, एयरक्राफ्ट और सेना के जवान — रूसी बेस, एयरफील्ड, पोर्ट, लॉजिस्टिक‑हब इस्तेमाल कर सकेंगे। और रूस भी भारत की सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेगा। यह सुविधा सिर्फ युद्ध के समय नहीं — बल्कि सामान्य समय, जोइंट ड्रिल, ट्रेनिंग, ह्यूमनिटेरियन मिशन, महा‑आपदाओं में राहत कार्य के दौरान भी लागू होगी।
साथ ही, इससे भारत की रणनीतिक पहुंच भी बढ़ेगी — खासकर अगर रूस की आर्कटिक या रूस के उत्तरी पोर्ट्स का इस्तेमाल किया जाए।
दोनों देशों के लिए फायदे क्यों मायने रखता है यह पैक्ट?
भारत को अब दूर‑दराज इलाकों तक लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलेगा — समुद्र, हवा या जमीन, जहाँ रूस के आधार मौजूद हैं।रूस को भी हिन्द महासागर क्षेत्र में भारत के पोर्ट्स, एयरबेस या सुविधाएं मिल जाएँगी जिससे उसकी एशिया‑प्रभाव क्षेत्रीय पहुँच मजबूत होगी। साथ ही, जोइंट ट्रेनिंग, आपदा राहत, नेवी/एयरफोर्स मिशन, और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग करना आसान हो जाएगा दायरा बड़ा, लॉजिस्टिक झंझट घटेगी।

क्यों इसे ऐतिहासिक माना जा रहा है?
क्योंकि रूस के साथ लॉजिस्टिक‑पैमाने का यह समझौता, पहले जितने भी रियायती समझौते थे — उनसे कहीं ज़्यादा व्यापक और गहरा है। यह सिर्फ आज का कदम नहीं आने वाले समय में दोनों देशों के रक्षा‑साझेदारी, सामूहिक सुरक्षा, और रणनीतिक तालमेल का आधार बनेगा।इसके अलावा, किसी विदेशी देश में स्थायी सैन्य बेस स्थापित किए बिना यानी राजनीति, खर्च, वाद‑विवाद से बचते हुए सहयोग का यह नया रास्ता है।RELOS Agreement भारत–रूस दोस्ती को सिर्फ कूटनीतिक या आर्थिक साझेदारी तक सीमित नहीं रखेगा।यह दोनों देशों की सेनाओं के बीच असली तालमेल, लॉजिस्टिक समर्थन, और ग्लोबल सुरक्षा सहयोग को नए मुकाम पर ले जाएगा।
