ICC वारंट के बीच पुतिन की भारत यात्रा? बड़ा geopolitical सवाल
आज हम बात करेंगे उस बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर की, जिसने दुनिया की राजनीति में हलचल मचा दी है रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
और सबसे अहम सवाल…अगर पुतिन भारत आते हैं, तो क्या भारत उन्हें गिरफ्तार करेगा?अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय यानी ICC ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ वारंट जारी किया था।दावा किया गया कि युद्ध के दौरान बच्चों को यूक्रेन से रूस ले जाने से जुड़े आरोप उन पर लगाए गए।लेकिन यहाँ एक बड़ा पेच है रूस, अमेरिका, चीन और भारत ICC के सदस्य ही नहीं हैं।यानी ICC के आदेश उनके लिए बाध्यकारी नहीं होते।

क्या है ICC?
निदरलैंड्स के हेग में मौजूद अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) एक वैश्विक अदालत है, जिसके पास दुनिया के नेताओं और अन्य व्यक्तियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर में सबसे गंभीर अपराधों के लिए मुकदमा चलाने की ताकत है. यह जनसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और आक्रमण जैसे आरोपों की जांच करता है और जरूरत पड़ने पर मुकदमा भी चलाता है.
पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
ICC की स्थापना साल 2002 में हुई थी. मार्च 2023 में अदालत ने पुतिन के खिलाफ कथित युद्ध अपराधों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. लेकिन, गिरफ्तारी वारंट के बावजूद, पुतिन को किसी दूसरे देश में हिरासत में लिए जाने की संभावना बहुत कम है.
वारंट को लेकर रूस क्या कहता है?
रूस और यूक्रेन दोनों ही ICC के सदस्य (signatories) नहीं हैं. वारंट जारी होने के बाद, क्रेमलिन के प्रवक्ता पेस्कोव ने कहा, रूस, कई अन्य देशों की तरह, इस अदालत के अधिकार क्षेत्र को मान्यता नहीं देता. साथ ही कहा था कि कानूनी तौर पर इस अदालत के किसी भी फैसले का रूसी संघ के लिए कोई महत्व नहीं है.
क्या भारत है बाध्य?
ICC को 124 देशों ने मंजूर किया है. लेकिन, भारत ICC का हिस्सा नहीं है और न ही नई दिल्ली ने इस मुख्य समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इसलिए, भारत इसकी शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है.
भारत पहले भी ऐसे नेताओं की मेजबानी कर चुका है जिनके खिलाफ ICC की कार्रवाई चल रही थी. 2015 में सूडान के तत्कालीन राष्ट्रपति ओमर हसन अल-बशीर भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने नई दिल्ली आए थे. वो पहले ऐसे मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष हैं जिन्हें ICC ने दारफुर में नागरिक आबादी पर हमले करवाने के आरोप में अभियुक्त ठहराया था.अतीत में भी भारत ने ऐसे मामलों में यही कहा है कि हम अंतरराष्ट्रीय कानूनों और राष्ट्रीय हितों के अनुसार काम करते हैं।इसलिए विश्लेषकों का मानना है कि भारत पुतिन का स्वागत करेगा, लेकिन ICC वारंट पर कोई कदम नहीं उठाएगा।तो कुल मिलाकर, पुतिन के खिलाफ ICC वारंट एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मुद्दा जरूर है,
लेकिन भारत के लिए यह एक कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक मामला है।भारत किस रास्ते जाएगा? वही, जो उसके अपने हितों को सबसे ज्यादा सुरक्षित रखता है।
