रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देगा पुतिन का दौरा!
Delhi: दिल्ली में आयोजित भारत–रूस शिखर वार्ता के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि इस दौरे का उद्देश्य सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि दोनों देशों के संबंधों में “नया मोड़” लाना है।पुतिन ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में रक्षा, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारत और रूस की साझेदारी और गहरी होगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत मित्र देशों का एकजुट होना बेहद ज़रूरी है और भारत इस दिशा में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।

वार्ता में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई—
- रक्षा सहयोग और हथियारों की सप्लाई
- ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में निवेश
- विज्ञान और तकनीक में साझेदारी
- व्यापार और शिक्षा के अवसर
वहीं, प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भारत को बिना रोक-टोक के तेल की सप्लाई जारी रखने का ऐलान किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत-रूस के बीच किसी लड़ाकू विमान या बड़े रक्षा सौदे का ऐलान नहीं हुआ, जबकि इसकी उम्मीद की जा रही थी।
इसके बावजूद कई अहम घोषणाएं हुईं, जिनका मकसद भारत-रूस व्यापार बढ़ाना है। भारत-रूस के बीच शिपबिल्डिंग, भारतीय नाविकों को बर्फीले (पोलर) समुद्री इलाकों में जहाज चलाने की ट्रेनिंग, नई शिपिंग लेन पर निवेश, सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) पर समझौते और MoU साइन किए गए।
भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का आज सुबह राष्ट्रपति भवन में 21 तोपों की सलामी से स्वागत हुआ। इसके बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। फिर पुतिन ने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।पुतिन ने इस दौरे को “ऐतिहासिक कदम” बताते हुए कहा कि इससे आने वाले दशक में भारत-रूस संबंध और सशक्त होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर कहा कि रूस भारत का भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार है और नई साझेदारी का रास्ता दोनों देशों के युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए अवसर खोलेगा।
इस मुलाकात के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि रक्षा और ऊर्जा सेक्टर में नए समझौते भारत की सुरक्षा और विकास को नई गति देंगे।
