कोविड के बाद पहली बार पूरे देश में जातिगत जनगणना, 2 चरणों में होगी गिनती
नई दिल्ली
भारत में लंबे इंतजार के बाद अब जातीय जनगणना की तारीखों का ऐलान हो गया है। केंद्र सरकार 1 मार्च 2027 से देशभर में जनगणना शुरू करेगी, जो दो चरणों में पूरी होगी। इससे पहले 2021 में जनगणना की योजना थी, लेकिन कोविड महामारी के कारण इसे टालना पड़ा था।
सरकार पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि इस बार जनगणना में जातिगत आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे। यह आंकड़े सरकार को नीति निर्माण और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण में मदद करेंगे। साथ ही, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने का कार्य भी इसी दौरान होगा।
पहाड़ी राज्यों में पहले शुरू होगी जनगणना
सूत्रों के अनुसार, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में यह प्रक्रिया 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हो जाएगी। इसके बाद देश के मैदानी भागों में 1 मार्च 2027 से जातीय जनगणना की शुरुआत होगी। इसके साथ ही अब जनगणना चक्र भी बदलेगा 2027, 2037 और फिर 2047 में जनगणना होगी।
पहली जनगणना से अब तक का सफर
भारत में पहली बार 1872 में जनगणना हुई थी, जबकि आजादी के बाद पहली जनगणना 1951 में और आखिरी बार 2011 में हुई थी। उस समय भारत की कुल जनसंख्या 121 करोड़ थी, लिंगानुपात 940 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष और साक्षरता दर 74.04% रही थी।
जातिगत जनगणना 1931 के बाद पहली बार
हालांकि भारत में जनगणना 1881 से नियमित हो रही है, लेकिन 1931 के बाद पहली बार सभी जातियों के आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। आजादी के बाद से अब तक केवल अनुसूचित जाति और जनजातियों के आंकड़े ही जारी किए जाते थे।
