शाह का अल्टीमेटम—समय से पहले पूरा…
देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण नामों में शामिल कुख्यात नक्सली हिडमा को सुरक्षा बलों ने उसके टारगेट से पहले ही खत्म कर दिया है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों को 30 नवंबर तक तय लक्ष्य पूरा करने का निर्देश दिया था, लेकिन ऑपरेशन ने इससे पहले ही बड़ी सफलता हासिल कर ली।
कौन था हिडमा?
हिडमा को नक्सली मूवमेंट का सबसे खतरनाक और रणनीतिक कमांडर माना जाता था।
वह कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड रहा और जंगलों में अपनी पकड़ व तेज़ मूवमेंट के कारण सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ था।

ऑपरेशन कैसे सफल हुआ?
सूत्रों के मुताबिक,
- सुरक्षा बलों को हिडमा की मूवमेंट की पुख्ता जानकारी मिली
- ऑपरेशन को मल्टी-लेयर प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया
- एरिया डोमिनेशन और इंटेलिजेंस सपोर्ट ने अभियान को निर्णायक मोड़ दिया
अंततः हिडमा को मुठभेड़ में मार गिराया गया, जिसे एजेंसियां नक्सल नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा झटका मान रही हैं।अमित शाह का 30 नवंबर का टारगेट
गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा बलों और टास्क फोर्स के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक में नक्सलवाद को निर्णायक रूप से कम करने के लिए 30 नवंबर तक अहम कार्रवाई पूरी करने का लक्ष्य तय किया था।हिडमा का सफाया इसी अभियान का हिस्सा था—और इसकी सफलता टारगेट डेट से पहले ही मिल गई।
क्या बदल जाएगा अब?
विशेषज्ञों का कहना है कि:
- हिडमा की मौत नक्सली संगठन की कमांड स्ट्रक्चर को कमजोर कर सकती है
- क्षेत्र में नक्सल गतिविधियाँ घटने की संभावना है
- सुरक्षा बलों को अब आगे की कार्रवाई में बड़ी रणनीतिक बढ़त मिल जाएगी
सरकारी अधिकारियों ने इसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।यह ऑपरेशन नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
