कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा – ट्रंप का बयान कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करता है
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावे पर भारत में सियासी भूचाल आ गया है। ट्रंप ने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम उनकी मध्यस्थता की वजह से ही संभव हो पाया। हालांकि भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। अब कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश राज्यमंत्री डॉ. शशि थरूर ने भी ट्रंप की टिप्पणी को “निराशाजनक” और “खतरनाक समानता” करार दिया है।
थरूर ने कहा कि ट्रंप का यह दावा भारत के लिए “पीड़ित और अपराधी के बीच गलत समानता” पैदा करता है। उन्होंने कहा, “इससे ऐसा लगता है कि अमेरिका पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद से जुड़े रिकॉर्ड को नजरअंदाज कर रहा है।”
“कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण नहीं”
थरूर ने ट्रंप के बयान को पाकिस्तान और आतंकवादियों के लंबे समय से चले आ रहे एजेंडे का समर्थन बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा कश्मीर को आंतरिक मामला माना है और कभी भी किसी तीसरे देश से मध्यस्थता की मांग नहीं की है, न भविष्य में करेगा।
उन्होंने चेताया कि ऐसे दावों से भारत और पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर एक ही पायदान पर खड़ा किया जा रहा है, जबकि भारत ने हमेशा इस धारणा का विरोध किया है। “साल 2000 से अब तक किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत-पाक को बराबरी पर नहीं रखा। ट्रंप की यह टिप्पणी एक पिछड़ा और अस्वीकार्य कदम है,” थरूर ने कहा।
क्या कहा था ट्रंप ने?
डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को दावा किया था कि उनके प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने में मध्यस्थता की भूमिका निभाई और व्यापार में कटौती की धमकी देकर दोनों देशों पर दबाव बनाया। उन्होंने इसे एक “स्थायी युद्धविराम” की शुरुआत भी बताया।
भारत सरकार ने खारिज किया दावा
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच हुई उच्चस्तरीय चर्चाओं में व्यापार या मध्यस्थता जैसे मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 9 मई को प्रधानमंत्री मोदी से बात की,
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 8 और 10 मई को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल से बात की,
इन चर्चाओं में व्यापार या कूटनीतिक दबाव की कोई चर्चा नहीं हुई।
भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि संघर्ष विराम केवल डीजीएमओ स्तर की द्विपक्षीय बातचीत से हुआ और इसमें कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं था।
शशि थरूर और भारत सरकार ने मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे को गलत, अनावश्यक और खतरनाक बताया है। यह विवाद एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की कूटनीतिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा रहा है।
