मॉडल विद्यालयों, शिक्षक तैनाती और ‘निपुण’ कार्यक्रम से शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव
लखनऊ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोक भवन में बेसिक शिक्षा विभाग की कई नई योजनाओं का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि हर विद्यालय में शिक्षक की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और शिक्षक-छात्र अनुपात को संतुलित किया जाए। उन्होंने कहा, “जहां शिक्षक होंगे, वहीं छात्र भी आएंगे। शिक्षक सिर्फ पढ़ाते नहीं, वे देश का भविष्य गढ़ते हैं।”
सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में कुछ स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षक अधिक हैं और छात्र कम, जबकि कई स्कूलों में छात्रों की संख्या अधिक है पर शिक्षक नहीं हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि शिक्षक तैनाती अब इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए की जाएगी, जिससे सभी विषयों की पढ़ाई सुचारु रूप से हो सके।
उन्होंने यह भी माना कि शुरुआत में बदलावों का विरोध हो सकता है, लेकिन जैसे ही परिणाम दिखेंगे, आलोचक भी चुप हो जाएंगे।
बीएड-एमएड छात्र जुड़ेंगे ‘निपुण’ कार्यक्रम से
मुख्यमंत्री ने बीएड और एमएड कर रहे छात्रों को ‘निपुण आकलन’ कार्यक्रम से जोड़ने का सुझाव दिया। इसके तहत एक सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण आयोजित होगा ताकि भावी शिक्षक स्कूलों में हो रहे बदलावों को नजदीक से देख सकें। इसके लिए एक विशेष प्रोफार्मा भी तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही ‘निपुण प्लस स्पॉट असेसमेंट’ योजना की भी शुरुआत की गई, जिससे छात्रों की त्वरित प्रगति का मूल्यांकन संभव होगा।
छात्रों को डीबीटी के जरिए 1200 रुपये की मदद
मुख्यमंत्री ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के यूनिफॉर्म, बैग, जूते-मोजे और स्टेशनरी की खरीद हेतु अभिभावकों के खातों में 1200 रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की। इस योजना के तहत 1200 करोड़ रुपये प्रदेशभर के अभिभावकों को भेजे गए।
मॉडल और अभ्युदय विद्यालयों का शिलान्यास
सीएम योगी ने 43 सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालयों और 66 अभ्युदय विद्यालयों का वर्चुअल शिलान्यास किया। इसके साथ ही 139 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में नव-निर्मित भवनों और छात्रावासों का लोकार्पण भी हुआ।
उन्होंने बताया कि हर जिले में दो मॉडल कंपोजिट विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं, जिन्हें 25 करोड़ की लागत से अटल आवासीय विद्यालयों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इन विद्यालयों में प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक की शिक्षा एक ही परिसर में दी जाएगी। भविष्य में हर विधानसभा क्षेत्र में ऐसे एक विद्यालय की स्थापना का लक्ष्य है।
