इमारत ध्वस्त करने से पहले मिसाइल को ‘सातवें आसमान’ पर क्यों भेजा गया?
मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत को लेकर नई जानकारी सामने आ रही है, जिसमें बताया जा रहा है कि हमले के दौरान मिसाइल को सीधे लक्ष्य पर नहीं दागा गया था, बल्कि पहले उसे बहुत ऊँचाई तक भेजा गया। इस रणनीति को सैन्य भाषा में खास प्रकार की मिसाइल तकनीक माना जाता है।
पहले आसमान की ओर क्यों भेजी गई मिसाइल?
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार मिसाइल को पहले ऊँचाई पर भेजने के पीछे कई अहम कारण होते हैं।
सबसे पहला कारण है एयर डिफेंस सिस्टम से बचना। अगर मिसाइल सीधे लक्ष्य की ओर जाती है तो दुश्मन के रडार उसे आसानी से पकड़ सकते हैं। लेकिन जब उसे पहले ऊपर भेजा जाता है, तो उसकी दिशा और गति बदल जाती है, जिससे उसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
दूसरा कारण है हमले की ताकत बढ़ाना। जब मिसाइल बहुत ऊँचाई से नीचे गिरती है तो उसकी रफ्तार और ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है। इससे लक्ष्य पर हमला ज्यादा शक्तिशाली और विनाशकारी हो सकता है।

तेहरान में अली खामेनेई की हत्या कैसे की गई?
अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने के लिए सीआईए और मोसाद ने संयुक्त ऑपरेशन तैयार किया. इसके लिए ईरान में जासूस तैनात किए गए. इन जासूसों ने खामेनेई की जानकारी इकट्ठा की. ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद सबसे पहले सुप्रीम लीडर को ही टारगेट करने का फैसला किया गया.
28 फरवरी को जब खामेनेई अपने आवास पर बैठक कर रहे थे, तभी उनके घर पर हमला कर दिया गया. इस हमले में खामेनेई, उनकी पत्नी, बेटी, दामाद, पोती और पोते की हत्या हो गई. खामेनेई के बेटे मोजतबा उस वक्त आवास में नहीं थे. वे जिंदा बच गए. अब उन्हें सुप्रीम लीडर बनाने की तैयारी हो रही है.
“सातवें आसमान” वाली रणनीति क्या है?
सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक इस तकनीक को अक्सर लॉफ्टेड ट्रेजेक्टरी कहा जाता है। इसमें मिसाइल को पहले बहुत ऊँचाई पर भेजा जाता है और फिर वह लगभग सीधी दिशा में नीचे गिरती है। इस तरह का हमला आम तौर पर कंक्रीट या मजबूत इमारतों को ध्वस्त करने के लिए ज्यादा प्रभावी माना जाता है।
यही वजह बताई जा रही है कि हमले से पहले मिसाइल को “सातवें आसमान” तक भेजा गया, ताकि नीचे गिरते समय उसकी ताकत कई गुना बढ़ जाए और लक्ष्य पूरी तरह नष्ट हो सके।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी हलचल
इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। कई देशों के रणनीतिक विशेषज्ञ इस हमले की तकनीक और इसके राजनीतिक असर पर चर्चा कर रहे हैं। मध्य-पूर्व में पहले से ही मौजूद तनाव के बीच यह मामला क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
क्या आगे और खुलासे होंगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर और भी जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल यह साफ है कि आधुनिक युद्ध में मिसाइल तकनीक और रणनीति लगातार बदल रही है, और इसी वजह से ऐसे हमलों की प्रकृति भी पहले से कहीं ज्यादा जटिल होती जा रही है।
